आज कल एक नया रुझान तेजी से वायरल हो रहा है।
होटल में क़ियाम और प्राइवेसी की हिफ़ाज़त
ज़िंदा लोगों को भी कंधे की ज़रूरत होती है
क्या फ़रिश्ते सच में कापी और पेंसिल के साथ लिखते हैं?
परिवार क्यों बिखर रहा है? खाने से जोड़ें
चलते सब हैं, पहुँचता कोई नहीं
माँ तो आखिर माँ होती है