होटल में क़ियाम और प्राइवेसी की हिफ़ाज़त

मियाँ बीवी होटल में क़ियाम के दौरान एहतियात क्यों ज़रूरी है?

अगर आप अहले-ख़ाना के साथ किसी सफ़र पर हों और होटल में क़ियाम करना पड़ जाए, तो चंद बुनियादी एहतियाती तदाबीर इख़्तियार करना दानिशमंदी है। आज के दौर में जहाँ सहूलियात बढ़ी हैं, वहीं प्राइवेसी के मसाइल भी सामने आ रहे हैं, इस लिए हर फ़र्द को बाख़बर रहना चाहिए।

सब से पहले ये इत्मिनान कर लें कि जिस कमरे में आप ठहरे हैं वहाँ आपकी निजी ज़िंदगी महफ़ूज़ है। एहतियात का तक़ाज़ा है कि कमरे में दाख़िल होते ही एक सरसरी जायज़ा ले लिया जाए, ख़ास तौर पर उन जगहों का जहाँ आम तौर पर इलेक्ट्रॉनिक आलात या आराइशी अश्या रखी जाती हैं।

सादा एहतियाती तरीक़ा

1. कमरे की तमाम रोशनियाँ बंद कर दें ताकि अंधेरा हो जाए।


2. अपने मोबाइल फ़ोन का कैमरा ऑन करें।


3. इस बात का ख़याल रखें कि कैमरे का फ़्लैश बंद हो।


4. अब मोबाइल की स्क्रीन देखते हुए कमरे के चारों तरफ़ आहिस्ता-आहिस्ता कैमरा घुमाएँ।


5. अगर स्क्रीन पर किसी जगह ग़ैर-मामूली सुर्ख़ या चमकती हुई रोशनी नज़र आए, तो उस जगह पर ख़ास तवज्जो दें और एहतियात बरतें।



ऐसी सूरत में घबराहट के बजाए होटल इंतिज़ामिया से फ़ौरी राब्ता करें और मुनासिब क़दम उठाएँ। ख़ुद कोई ऐसा अमल न करें जो बाद में आपके लिए परेशानी या बदनामी का सबब बने।

अहम बात

ये तदाबीर बदगुमानी के लिए नहीं, बल्कि हिफ़ाज़त और शऊर के लिए हैं। इस्लाम भी हमें अपनी इज़्ज़त, पर्दे और निजी ज़िंदगी की हिफ़ाज़त का दर्स देता है। एहतियात इख़्तियार करना कमज़ोरी नहीं बल्कि दानाई है।

हम सब की ज़िम्मेदारी है कि एक दूसरे तक मुफ़ीद और दुरुस्त आगाही पहुँचाएँ, ताकि मुआशरे में एतिमाद भी क़ायम रहे और इज़्ज़तें भी महफ़ूज़ रहें।